अहले बैत (नबी का घराना): परिचय और संक्षिप्त वर्णन
अहले बैत-ए-अतहार (पाक घराने,रज़ियल्लाहु अन्हुम) परिचय और संक्षिप्त वर्णन
"अहले बैत" का अर्थ है: घर वाले। जैसे "अहले मक्का" (मक्का वाले), "अहले इल्म" (ज्ञान वाले)। घर वालों में सबसे पहले पत्नियाँ आती हैं। इसलिए अहले बैत में सबसे पहले नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पाक पत्नियाँ (अज़वाज-ए-मुतह्हरात रज़ियल्लाहु अन्हुन्ना) शामिल हैं। सूरा अहज़ाब की आयत-ए-ततहीर "इन्नमा युरीदुल्लाहु लियुज़्हिबा अनकुमुर्रिज्सा अहलेल बैत" भी अज़वाज-ए-पैगंबर रज़ियल्लाहु अन्हुन्ना के हक़ में उतरी, जैसा कि आगे-पीछे की सभी आयतों से स्पष्ट है। (रूहुल म'आनी)
रसूल के सहाबी हज़रत ज़ैद बिन अर्कम रज़ियल्लाहु अन्हु ने फरमाया:
**"निसाउहू मिन अहले बैतिहि"** - "नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पत्नियाँ आपके अहले बैत हैं।" (तफसीर इब्न कसीर, जिल्द 3, पृष्ठ 502; कन्ज़ुल उम्माल, जिल्द 11, पृष्ठ 586)
इमाम इब्न कसीर रहमतुल्लाहि अलैहि फरमाते हैं:
**"व हाज़ा नस्सुन फी दुखूले अज़वाजिन्नबिय्यि सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम फिल अहलिल बैति हाहुना"** - "यह आयत अज़वाज-ए-मुतह्हरात रज़ियल्लाहु अन्हुन्ना के अहले बैत में दाखिल होने पर एक स्पष्ट पाठ (नस्स) है।"
मौलाना मुफ्ती मुहम्मद तक़ी उस्मानी मुद्दा जिल्लहुल आली लिखते हैं:
"क्योंकि आगे-पीछे सारा ज़िक्र अज़वाज-ए-मुतह्हरात रज़ियल्लाहु अन्हुन्ना का चल रहा है, इसलिए वे तो अहले बैत रज़ियल्लाहु अन्हुम में सीधे दाखिल हैं, लेकिन लफ़्ज़ों के उमूम (व्यापक अर्थ) में आंहज़रत सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की साहिबज़ादियाँ और उनकी औलाद भी दाखिल हैं।" (आसान तर्जुमा कुरआन, तफसीर आयत-ए-ततहीर)
बेशक, नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने बच्चों को भी चादर में लेकर अहले बैत रज़ियल्लाहु अन्हुम की इस ततहीर (पवित्रता) व तक़द्दुस (पवित्रता) में शामिल फरमाया। निम्नलिखित रिवायत देखें:
**"हज़रत आयशा सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहु अन्हा बयान करती हैं: नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सुबह के वक़्त एक ऊनी चादर ओढ़े हुए बाहर तशरीफ लाए, तो आप के पास हज़रत हसन बिन अली रज़ियल्लाहु अन्हुमा आए, तो आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उन्हें उस चादर में दाखिल कर लिया। फिर हज़रत हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु आए और वह भी उनके साथ चादर में दाखिल हो गए। फिर सैय्यिदा फातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा आईं और आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उन्हें भी इस चादर में दाखिल कर लिया। फिर हज़रत अली करमल्लाहु वज्हहु आए तो आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उन्हें भी चादर में ले लिया। फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने यह आयत-ए-मुबारक पढ़ी: 'इन्नमा युरीदुल्लाहु लियुज़्हिबा अनकुमुर्रिज्सा अहलेल बैत व युतह्हिरकुम ततहीरा' (सूरा अल-अहज़ाब: 33)।"** (सहीह मुस्लिम)
**"हज़रत स'द बिन अबी वक़्कास रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं: जब आयत-ए-मुबाहिला (फक़ुल त'आलौ नद'उ अब्नाअना व अब्नाअकुम) (आल-ए-इमरान: 61) नाज़िल हुई, तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हज़रत अली, हज़रत फातिमा, हज़रत हसन और हज़रत हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हुम को बुलाया, फिर फरमाया: 'ऐ अल्लाह! ये मेरे अहल (बैत) हैं।'"** (सहीह मुस्लिम, जामे तिर्मिज़ी)
इस हदीस को **"हदीस-ए-कसा"** कहा जाता है।
नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने चादर (कसा) में हज़रत अली मुर्तज़ा करमल्लाहु वज्हहु को भी लिया और अहले बैत में दाखिल फरमाया, क्योंकि हज़रत अली मुर्त्ज़ा रज़ियल्लाहु अन्हु भी नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के बच्चों के हुक्म में हैं। उनकी परवरिश आग़ोश-ए-नबुव्वत में हुई। नजरान के नसारा के खिलाफ मुबाहिला में भी उनको ले गए। आयत-ए-मुबाहिला में **"अब्नाअना"** के लफ़्ज़ों में सैय्यिदना अली मुर्तज़ा रज़ियल्लाहु अन्हु दाखिल व शामिल हैं, जैसा कि म'आरिफुल कुरआन में हज़रत मुफ्ती मुहम्मद शफ़ी उस्मानी रहमतुल्लाहि अलैहि ने लिखा है।
अहले बैत की तीसरी क़िस्म वह है जिन्हें नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कुछ सहाबा कराम रज़ियल्लाहु अन्हुम को ए'ज़ाजी तौर पर अपने अहले बैत में शामिल फरमाया, जैसा कि हज़रत सलमान फारसी रज़ियल्लाहु अन्हु के बारे में फरमाया:
**"सलमानु मिन्ना अहलल बैत"** - "सलमान हमारे अहले बैत में से हैं।" (मुस्तदरक हाकिम)
**निष्कर्ष:** अहले बैत अतहार में नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पाक पत्नियाँ, आप की औलाद (तीन बेटे और चार बेटियाँ) और औलाद की औलाद (पाँच नवासे और तीन नवासियाँ), हज़रत अली मुर्तज़ा करमल्लाहु वज्हहु और दूसरी शख्सियतें शामिल हैं, जिन्हें नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अहले बैत के मफ़हूम में दाखिल फरमाया। अहले बैत का लफ़्ज़ बोलते ही हमारा ज़हन जो सिर्फ खानदान-ए-सैय्यिदना अली मुर्तज़ा रज़ियल्लाहु अन्हु की तरफ जाता है, यह शिया तअस्सुर मालूम होता है और गलतफ़हमी पर मुबनी है, क्योंकि शिया श्नीआ के नज़दीक अहले बैत सिर्फ हज़रत अली मुर्तज़ा रज़ियल्लाहु अन्हु के घराने के लोग हैं। इसी लिए उन्होंने पंजतन पाक का नारा लगाया। हिदानल्लाहु इलस्सिरातिल मुस्तक़ीम।
**(नोट: यहाँ 'पंजतन पाक' का जिक्र है जो शिया विश्वास से संबंधित है। सुन्नी मुसलमानों का मानना है कि अहले बैत का दायरा इससे कहीं अधिक व्यापक है, जैसा कि ऊपर बताया गया है।)**
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**(यहाँ से लेख में अहले बैत के विभिन्न सदस्यों का विस्तृत परिचय दिया गया है, जिसका अनुवाद नीचे संक्षेप में दिया जा रहा है।)**
### **अहले बैत अतहार रज़ियल्लाहु अन्हुम से मुहब्बत**
हदीसों में अहले बैत से मुहब्बत करने पर बहुत ज़ोर दिया गया है। उन पर दुरूद भेजना, उनका इज़्ज़त-ए-क़लब करना ईमान का हिस्सा है। हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं: **"नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का ख़याल और लिहाज़ अहले बैत के इकराम व त'ज़ीम करके रखो।"** हज़रत हसन रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं: **"हर चीज़ की एक बुनियाद होती है और इस्लाम की अस्ल बुनियाद नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सहाबा और आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के अहले बैत से मुहब्बत करना है।"**
हुज्जतुल इस्लाम हज़रत मौलाना मुहम्मद क़ासिम नानोत्वी रहमतुल्लाहि अलैहि फरमाते हैं कि सहाबा कराम रज़ियल्लाहु अन्हुम एक आँख हैं और अहले बैत अतहार रज़ियल्लाहु अन्हुम दूसरी आँख। एक को फोड़ दें तो भी अपना नुकसान है और अगर दूसरी आँख को फोड़ें तो भी अपना नुकसान है।
### **नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की अज़वाज-ए-मुतह्हरात रज़ियल्लाहु अन्हुन्ना (पाक पत्नियाँ)**
लेख में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सभी 11 पत्नियों का संक्षिप्त परिचय दिया गया है:
1. **हज़रत खदीजतुल कुबरा रज़ियल्लाहु अन्हा:** पहली मुसलमान और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पहली पत्नी।
2. **हज़रत सौदा बिनत ज़म'आह रज़ियल्लाहु अन्हा**
3. **हज़रत आयशा सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहु अन्हा:** हज़रत अबू बक्र रज़ियल्लाहु अन्हु की बेटी, बहुत अलिमा और फक़ीहा थीं।
4. **हज़रत हफ़्सा बिनत उमर रज़ियल्लाहु अन्हा:** हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु की बेटी।
5. **हज़रत ज़ैनब बिनत ख़ुज़ैमा रज़ियल्लाहु अन्हा:** उम्मुल मसाकीन (गरीबों की माँ) के नाम से मशहूर।
6. **हज़रत उम्मे सलमा रज़ियल्लाहु अन्हा**
7. **हज़रत ज़ैनब बिनत जह्श रज़ियल्लाहु अन्हा**
8. **हज़रत जुवैरिया बिनत हारिस रज़ियल्लाहु अन्हा**
9. **हज़रत उम्मे हबीबा रज़ियल्लाहु अन्हा:** हज़रत अबू सुफियान रज़ियल्लाहु अन्हु की बेटी।
10. **हज़रत सफ़िय्या बिनत हुयै बिन अख़्तब रज़ियल्लाहु अन्हा**
11. **हज़रत मैमूना बिनत हारिस रज़ियल्लाहु अन्हा**
### **नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की चार बेटियाँ**
1. **सैय्यिदा ज़ैनब रज़ियल्लाहु अन्हा:** सबसे बड़ी बेटी। हज़रत अबुल आस बिन रबी' से निकाह हुआ।
2. **सैय्यिदा रुकैय्या रज़ियल्लाहु अन्हा:** हज़रत उस्मान रज़ियल्लाहु अन्हु से निकाह हुआ। 2 हिजरी में इंति काल।
3. **सैय्यिदा उम्मे कुलसूम रज़ियल्लाहु अन्हा:** हज़रत रुकैय्या रज़ियल्लाहु अन्हा के इंति काल के बाद हज़रत उस्मान रज़ियल्लाहु अन्हु से निकाह हुआ।
4. **सैय्यिदा फातिमतुज़ ज़हरा रज़ियल्लाहु अन्हा:** सबसे छोटी और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की लाडली बेटी। हज़रत अली मुर्तज़ा रज़ियल्लाहु अन्हु से निकाह हुआ। नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के वफात के 6 महीने बाद इंति काल।
### **नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के तीन बेटे**
1. **हज़रत कासिम रज़ियल्लाहु अन्हु:** इन्हीं की वजह से नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की कुनियत अबुल कासिम है। बचपन में इंति काल।
2. **हज़रत अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हु:** तय्यिब और ताहिर भी कहलाते हैं। बचपन में इंति काल।
3. **हज़रत इब्राहीम रज़ियल्लाहु अन्हु:** नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की बांदी हज़रत मारिया क़िब्तिया रज़ियल्लाहु अन्हा से पैदा हुए। डेढ़-दो साल की उम्र में इंति काल।
### **नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पाँच नवासे**
1. **हज़रत हसन बिन अली रज़ियल्लाहु अन्हुमा:** हज़रत फातिमा और हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हुमा के बड़े बेटे। सैय्यिदु शबाबि अहलिल जन्ना (जन्नती जवानों के सरदार)। 49 हिजरी में इंति काल।
2. **हज़रत हुसैन बिन अली रज़ियल्लाहु अन्हुमा:** हज़रत फातिमा और हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हुमा के दूसरे बेटे। सैय्यिदु शबाबि अहलिल जन्ना (जन्नती जवानों के सरदार)। कर्बला में 61 हिजरी में शहादत।
3. **हज़रत मुहसिन बिन अली रज़ियल्लाहु अन्हुमा:** हज़रत फातिमा और हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हुमा के तीसरे बेटे। बचपन में इंति काल।
4. **हज़रत अली बिन अबिल आस रज़ियल्लाहु अन्हुमा:** सैय्यिदा ज़ैनब रज़ियल्लाहु अन्हा के बेटे।
5. **हज़रत अब्दुल्लाह बिन उस्मान रज़ियल्लाहु अन्हुमा:** सैय्यिदा रुकैय्या रज़ियल्लाहु अन्हा के बेटे। बचपन में इंति काल।
### **नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की तीन नवासियाँ**
1. **सैय्यिदा ज़ैनब बिनत अली अल-मुर्तज़ा रज़ियल्लाहु अन्हुमा:** हज़रत फातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा की बेटी। हज़रत अब्दुल्लाह बिन जा'फर तय्यार रज़ियल्लाहु अन्हुमा से निकाह हुआ। कर्बला में हज़रत हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु के साथ थीं।
2. **सैय्यिदा उम्मे कुलसूम बिनत अली अल-मुर्तज़ा रज़ियल्लाहु अन्हुमा:** हज़रत फातिमा और हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हुमा की बेटी। हज़रत उमर फारूक़ रज़ियल्लाहु अन्हु से निकाह हुआ।
3. **सैय्यिदा उमामा बिनत अबिल आस रज़ियल्लाहु अन्हा:** सैय्यिदा ज़ैनब रज़ियल्लाहु अन्हा की बेटी। नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उनसे बहुत मुहब्बत करते थे। हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु से निकाह हुआ।
**आख़िरी कलिमात:**
ये सब नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के अहले बैत हैं। अहले ईमान की आँखों के तारे, दिल का सरूर, ईमान का मर्कज़ व मिहवर, सफ़ीने-ए-निजात, मुहब्बत का मर्ज'अ हैं। उनसे मवद्दत (प्रेम) व अक़ीदत वाजिब है, उनकी तबीअत (अनुसरण) ज़रूरी है, त'ज़ीम व तौक़ीर नागुज़ीर है और इकराम व एहतराम लाज़िम है। ये सब तस्लीम व रज़ा और सब्र व इस्तिक़्लाल के कोहे-गिरां थे। उनकी ज़िंदगी का मक़सद-ए-वहीद रज़ाए इलाही का हुसूल था। जीना और मरना सिर्फ मंशाए इलाही के मुताबिक़ व मुवाफिक़ था। हक़ के लिए डट जाना और बातिल से लड़ जाना उनका वस्फ़-ए-मुमताज़ था। वह दुनिया व आख़िरत में सरख़रू ठहरे। निजात व हिदायत की सारी राहें उन्हीं से खुलती हैं और उन्हीं पर बंद हो जाती हैं।
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