पैगंबर (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) के वो साथी (सहाबा) जो भारत आए
पैगंबर (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) के वो साथी (सहाबा) जो भारत आए
इस किताब के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) के कई साथियों ने इस्लाम का प्रचार करने और व्यापार के लिए भारत का रुख किया। उनमें से कुछ तो पैगंबर के जीवनकाल में ही भारत आए, जबकि कुछ बाद में आए। इन सहाबा ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों—जैसे केरल, गुजरात, सिंध और दक्षिण भारत—में इस्लाम के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1. हज़रत मलिक बिन दीनार (रज़ियल्लाहु अन्हु)
- वह पैगंबर के प्रमुख साथी थे और भारत में इस्लाम लाने वाले पहले लोगों में से एक माने जाते हैं।
- उन्होंने केरल के तटीय इलाकों में मस्जिदें बनवाईं, जिनमें **चेरामन जुमा मस्जिद** (कोडुनगल्लूर, केरल) सबसे प्रसिद्ध है।
- उनके साथ उनके भाई **हज़रत मलिक बिन हबीब** और अन्य परिवार के सदस्य भी आए।
2. हज़रत तामीम अंसारी (रज़ियल्लाहु अन्हु)
- यह वही सहाबी हैं जिन्होंने पैगंबर को "दज्जाल" (झूठे मसीहा) के बारे में एक लंबी हदीस सुनाई थी।
- किताब के अनुसार, उन्होंने भारत में व्यापार और धर्म प्रचार किया।
3. हज़रत सहल बिन तैयब (रज़ियल्लाहु अन्हु)
- उनका नाम भारत के पश्चिमी तट पर स्थित एक प्राचीन बंदरगाह से जुड़ा है।
- उन्होंने स्थानीय लोगों को इस्लाम की दावत दी।
4. हज़रत अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अन्हु) के वंशज
- पहले खलीफा हज़रत अबू बक्र के कुछ वंशज भारत आए और यहाँ बस गए।
- उन्होंने गुजरात और सिंध क्षेत्र में इस्लामी शिक्षा फैलाई।
5. हज़रत उस्मान बिन अफ्फान (रज़ियल्लाहु अन्हु) के प्रतिनिधि
- तीसरे खलीफा हज़रत उस्मान के शासनकाल में कुछ सहाबा को व्यापार और धर्म प्रचार के लिए भारत भेजा गया।
6. हज़रत अब्दुर्रहमान बिन समुरा (रज़ियल्लाहु अन्हु)
- उन्होंने सिंध और मुल्तान क्षेत्र में इस्लाम का प्रचार किया।
- उन्हें एक साहसी योद्धा और दावती (धर्म प्रचारक) के रूप में जाना जाता है।
7. हज़रत मुगीरा बिन शुबा (रज़ियल्लाहु अन्हु)
- वह पैगंबर के साथ बद्र की लड़ाई में शामिल थे।
- भारत में उनकी गतिविधियों का उल्लेख व्यापार और धर्म प्रसार से जुड़ा है।
8. हज़रत हुजैफा बिन अल-यमान (रज़ियल्लाहु अन्हु)
- उन्हें पैगंबर का विश्वासपात्र साथी माना जाता था।
- भारत आकर उन्होंने स्थानीय शासकों से संपर्क किया।
भारत में सहाबा के आगमन का महत्व
- इस किताब के अनुसार, सहाबा ने भारत में न केवल इस्लाम का संदेश पहुँचाया, बल्कि वे यहाँ की संस्कृति और समाज में घुल-मिल गए।
- उन्होंने मस्जिदें, मदरसे और व्यापार केंद्र स्थापित किए।
- केरल, गुजरात, सिंध और दक्षिण भारत में आज भी उनके नाम से जुड़े धार्मिक स्थल मौजूद हैं।
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नोट: यह जानकारी किताब ("सहाबा कराम हिंद में") पर आधारित है।
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